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नेपाली सेना की वर्दी में पिथौरागढ़ सीमा पर दिखा चीनी दल, संदिग्ध दल को देखकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क

This News was published on: 3:33 PM

नई दिल्‍ली/पिथोरागढ़। भारत चीन के हिंसक झड़प के बाद गर्बाधार से चीन सीमा लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम तेज कर दिया है। नेपाल ने दार्चुला-टिंकर सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इस निर्माण कार्य में नेपाल के नहीं बल्कि 30 चीनी इंजिनियर लगे हुए हैं। जिन्हें नेपाल ने नेपाली सैनिकों की वर्दी में सैनिक हेलीकॉप्टर के जरिए वहाँ पहुँचाया है और उसी से निर्माण कार्य में लगने वाले समान को भी मुहैया कराया जा रहा हैं।

भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों के संबंधों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया हैं। वहीं चीन के बहकावे में आने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में भी पिछले महीने से कड़वाहट आ गई हैं। भारत के लिम्पियाधुरा-लिपुलेख-कालापानी क्षेत्र को नेपाल द्वारा अपने नक्शे में दिखना कहीं न कहीं दो पड़ोसी देशों के आपसी संबंधों को खराब कर रहा हैं।

वहीं भारत ने जबसे पिथोरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है तबसे नेपाल और चीन दोनों परेशान हैं और उसके बाद नेपाल ने भी दार्चुला-टिंकर सड़क पर काम शुरू कर दिया था। पहाड़ काट कर लगभग 134 किमी लंबी सड़क को तैयार किया जाना है।

खबरों के अनुसार दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए नेपाल निर्माण निगम के विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण करने को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे। वहीं चीन ने अपनी चाल चलते हुए इसपर एक बड़ा दाव खेला हैं।

दरअसल, बिगड़ते हालातों के देखते हुए अब वन बेल्ट व रोड परियोजना को लेकर चीनी कंपनी के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड की पिथौरागढ़ सीमा से सटे क्षेत्र में नेपाली सेना का ड्रेस पहनकर यहाँ निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

कोरोना महामारी की वजह से चीन नेपाल में भैरहवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोखरा एयरपोर्ट और काठमांडू के पशुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तार के साथ ही चार जल विद्युत परियोजनाओं पर चल रहा काम बंद हो गया था। जिसके बाद चीनी विशेषज्ञों ने अपने लोगों को भारत से लगते सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए लगा दिया।

बता दें गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बाद नेपाल ने विरोध दर्ज कराकर दार्चुला-टिंकर सड़क मार्ग पर काम शुरू कर दिया था। इस निर्माण कार्य के चलते भारतीय क्षेत्र में अक्सर पालपा, लामारी, बूंदी और गब्र्यांग के स्थानीय लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों को सैनिकों के हावभाव- बोलचाल, उनके शारीरिक बनावट चीनी नागरिकों जैसी लगीं। जिसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी दल की उपस्थिति को गंभीरता से लिया हैं और वहाँ अतिरिक्त सेना बलों की तैनाती कर दी हैं।

नेपालियों को भारत के सामने खड़ा कर चीन उनकी आड़ में भारत से जुड़े सारे मुद्दों में दखल दे रहा हैं। जहाँ एक तरफ रेलवे लाइन का काम शुरू करवा दिया वहीं दूसरी और भारत से सटे प्रमुख मधेशी क्षेत्रों में सर्वे भी करा रहा हैं। जिसमें उसने भारतीय धारचूला-तवाघाट-गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के समानान्तर नेपाल ने सदरमुकाम दार्चुला-सुनेसरा-घाटीबगड़- छांगरु-टिंकर चीन सीमा भज्यांग तक सड़क निर्माण की योजना तैयार किया है।

आपको बता दे इससे पहले भारत के बूंदी गाँव के बुदियालों की जमीन पर नेपाली सेना चार किमी तक बंद पैदल मार्ग खोलने में जुटी थी। भारत के बूंदी गाँव के सामने काली नदी पार नेपाल में पड़ता है। नक्शे में भारत के कालापानी क्षेत्र को अपना बताने वाले और सड़क और हुए तकरार के बाद नेपाल ने वहाँ पर नजर रखने के लिए छांगरू में सशस्त्र बल की तैनाती शुरू कर दी है। जिसके चलते अब सशस्त्र बल के साथ ही नेपाली सेना द्वारा पूरे क्षेत्र पर नजर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्ण चंद्र थापा ने खुद बुधवार को विवादित कालापानी क्षेत्र का दौरा किया था। मई में भारत के साथ सीमा विवाद के बाद पश्चिम प्रदेश क्षेत्र में उनकी यह पहली यात्रा थी। भारत द्वारा 8 मई को दार्चुला-लिपुलेख लिंक सड़क का उद्घाटन करने के बाद नेपाल ने पिछले महीने नेपाल सशस्त्र पुलिस बल द्वारा यहाँ पर एक चौकी स्थापित की है।

नेपाल सुरक्षा बलों ने की थी भारतीय नागरिक पर फायरिंग

उल्लेखनीय हैं कि नक्शे को लेकर हुए विवाद के कुछ दिन बाद ही बिहार के सीतामढ़ी जिले से सटे नेपाल सीमा पर नेपाली सुरक्षा बलों ने 15 राउंड फायरिंग की। जिसमें गाँव में खेत में काम कर रहे कुछ मजदूरों को गोली लगी थी। इसमें नागेश्वर राय के 25 वर्षीय पुत्र डिकेश कुमार की मौत हो गई थी। वहीं तीन लोग ज़ख्मी हो गए थे।

नक्शे पर विवाद

बता दें कि हाल ही में नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। नेपाल सरकार द्वारा लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने नए राजनीतिक नक़्शे में दिखाने पर भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के किसी क्षेत्र पर इस तरह के दावे को भारत द्वारा नहीं स्वीकार किया जाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि नेपाल सरकार ने जो आधिकारिक नक़्शा जारी किया है उसमें भारतीय क्षेत्र को नेपाल में दिखाया गया है, ये एकतरफ़ा हरकत ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। इसका भारत विरोध करता है।

 

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