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फोन टेपिंग मामले में केंद्र ने राजस्‍थान के मुख्‍य सचिव से मांगी रिपोर्ट, गवर्नर से मिले गहलोत

This News was published on: 3:34 AM

जयपुर। राजस्थान की सियासी सरगर्मी की आंच दिल्‍ली तक पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्‍थान के मुख्‍य सचिव से फोन टैपिंग मामले पर रिपोर्ट तलब कर ली है। गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव से कहा है कि गहलोत सरकार के खिलाफ कथित साजिश के सिलसिले में दो ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद फोन टैपिंग के आरोपों को लेकर रिपोर्ट सौंपी जाए। राजस्थान पुलिस के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गहलोत सरकार के खिलाफ साजिश रचे जाने को लेकर दो ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

अशोक सिंह और भारत मलानी का वाइस सेंपल देने से इनकार 

एसीबी के महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने कहा है कि कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी की शिकायत के आधार पर ब्यूरो ने मामला दर्ज किया है। एफआइआर में कांग्रेस के बागी विधायक भंवरलाल शर्मा और गजेंद्र सिंह तथा एक तीसरे व्यक्ति संजय जैन के बीच बातचीत का विवरण है। कांग्रेस का दावा है कि ये केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह हैं। भाजपा नेता अशोक सिंह और भारत मलानी ने फोन टैपिंग मामले की जांच के लिए अपनी आवाज के नमूने (Voice Sample) देने से इनकार कर दिया है।

संजय जैन को चार दिन की रिमांड, राज्‍यपाल से मिले गहलोत 

इस बीच जयपुर की एक अदालत ने संजय जैन को राजस्थान पुलिस के स्‍पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (Special Operations Group, SOG) की चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है। बता दें कि कथ‍ित खरीद फरोख्‍त के सनसनीखेज ऑडियो टेप सामने आने के बाद राजस्थान कांग्रेस और भाजपा दोनों आमने-सामने आ गए हैं। राजस्थान एसओजी भी इस मामले की तेजी से छानबीन में जुट गई है। उधर, मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने शाम को राज्‍यपाल कलराज मिश्र से मिलने राजभवन पहुंचे जिससे तमाम अटकलें लगाई जाने लगीं।

बहुमत साबित करें गहलोत  

दूसरी ओर राजस्‍थान भाजपा ने कहा है कि राज्‍य के गृह एवं मुख्‍य सचिव ने फोन टैपिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में क्या बिना किसी आधिकारिक आदेश के फोन टैप करना हमारे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है? भाजपा नेता गुलाब चन्द कटारिया ने कहा कि हम फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं करते हैं लेकिन यदि अशोक गहलोत जी को लगता है कि उनके पास बहुमत है तो उन्हें इसे साबित करना चाहिए।

बीटीपी ने गहलोत को दिया समर्थन 

भारतीय ट्राइबल पार्टी (Bharatiya Tribal Party, BTP) ने गहलोत सरकार को अपना समर्थन दिया है। बीटीपी ने शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर उन्हें अपने समर्थन का पत्र सौंपा। बीटीपी ने कहा कि वह चाहती है कि राज्‍य में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार चले। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि BTP के दोनों विधायकों ने उनकी प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ मुलाकात करके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। इससे पहले बीटीपी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई में तटस्‍थ रहने की बात कही थी। बीटीपी विधायक राजकुमार रोट ने कहा कि वे सरकार के साथ खड़े हैं।

मायावती ने राष्‍ट्रपति शासन की मांग की 

राजस्थान में चल रही सियासी उठापठक पर बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा और कहा कि राज्यपाल कलराज मिश्र को राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन और बसपा के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया और अब जग-जाहिर तौर पर फोन टैप कराके एक और गैर-कानूनी और असंवैधानिक काम किया है।

वसुंधरा ने तोड़ी चुप्पी 

राजस्थान की पूर्व मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने सूबे में जारी सियासी घमासान पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा भाजपा नेताओं पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाना दुर्भाग्‍यपूर्ण हैं। कांग्रेस को अपने घर की लड़ाई में भाजपा नेताओं को नहीं घसीटना चाहिए। राजस्थान की जनता को कांग्रेस की अंदरुनी कलह की कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं भाजपा के मौजूदा विधायक और राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि सरकार गिराने की आज जैसी साजिश हो रही है, वैसी पहले कभी नहीं हुई।

सीबीआइ जांच की मांग 

वहीं फोन टैपिंग को लेकर सियासत गरमाई गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने फोन टैपिंग की वैधानिकता पर सवाल उठाए और राजस्थान में सरकार गिराने का प्रयास करने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्‍होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखकर फोन टैंपिंग किए जाने समेत विभिन्न प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। पात्रा के इस बयान के बाद कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ने खुलकर स्वीकार कर लिया कि उसने अशोक गहलोत सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की।

 

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