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रक्षाबंधन आज, मुहुर्त 1.44 के बाद

This News was published on: 11:51 AM

rakhi2तहलका एक्सप्रेस

बहन व भाई के प्रेम के प्रतीक का रक्षाबंधन शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हालांकि मुहुर्त दोपहर 1.44 के बाद है। शहर के विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रकार की राखियों की दुकानें सज गई हैं। राखी की दुकानों पर खरीददारों की भीड़ लगी हुई है। भाइयों के कलाई में राखी बांधने के लिए बहनें तैयारी कर चुकी हैं।

बाजार भी इसेक लिए सजा रहा। शहर के चौक, बड़ादेव, मातबरगंज, दलालघाट, पहाड़पुर तकिया, ब्रह्मस्थान, बिलिरया की चुंगी, हर्रा की चुंगी पर राखी खरीदने वालों का तांता लगा रहा। इस बीच बज रहे भाई बहन के प्यार के गीत सबको अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। कुल मिलाकर राखी की खुशियां बहनों व भाइयों के चेहरे पर साफ दिख रही हैं। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र में पर्व को लेकर उत्साह बना हुआ है। बोंगरिया प्रतिनिधि के अनुसार भाई बहन का स्नेह पर्व रक्षाबंधन अबकी भद्रा की काली छाया से ग्रसित रहेगा। इसके चलते बहनों को राखी बांधने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ेगा। आज भद्रा समाप्त होने के बाद दोपहर 1.44 बजे के बाद ही राखी बांध सकेंगी। आज श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनेगा लेकिन भद्रा लगने से पर्व में हल्का विध्न पड़ गया है। आचार्य झिनकू तिवारी बताते हैं कि निर्णय ¨सधु के अनुसार भद्रा में होलिका दहन व राखी बांधने की मनाही है। अगर भद्र काल में दोनों कर्म कोई करता है तो उसका शुभ के बजाय अशुभ फल प्राप्त होता है।

अच्छी भी होती है भद्रा

ज्योतिर्विद हवलदार पांडेय बताते हैं कि भद्रा का प्रभाव अशुभ के साथ शुभ भी होता है। रूद्रयामल ग्रंथ में इसका उल्लेख है। वह बताते हैं भद्रा स्वर्ग पाताल व मृत्यु लोक की मानी जाती है। तीनों को चार-चार राशियों में बांटा गया है। मेष, मकर, वृष व कर्क स्वर्ग लोक की भद्रा होती है। कन्या, मीन, तुला व धनु राशि में पाताल लोक की भद्रा मानी जाती है जबकि कुंभ, मीन कर्क व ¨सह राशि में पड़ने वाली भद्रा मृत्युलोक की है। स्वर्ग व पाताल लोक भद्रा से धन, यशकीर्ति की प्राप्ति होती है जबकि मृत्युलोक की भद्रा मृत्यु कारक होती है। आज मीन राशि में चन्द्रमा का संचरण होगा। इसी कारण आज के दिन मुत्युलोक की भद्रा मानी जाएगी।

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पूरब मुख करके बंधवाएं राखी

श्री कृष्णन पीजी कालेज बॉसगांव संस्कृत के प्रवक्ता डा. कमलाकर तिवारी बताते हैं कि राखी बंधवाने वाले का मुख पूरब की ओर होना चाहिए, सिर पर एक साफ कपड़ा अवश्य हो। बहन भाई के माथे पर रोली व अक्षत लगाने के बाद ही राखी बांधे।

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राशि के अनुसार बांधें राखी

राशि के स्वामी के अनुसार राखी बांधना अधिक पुण्यकारी होगा। इसमें हर राशि के ब्यक्ति को उसी रंग की राखी बांधनी चाहिए जो उसके स्वामी से मिलता हो।

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राशि : राखी का रंग

मेष : लाल रंग धागा की राखी।

वृष : चांदी या सिल्वर रंग की राखी।

मिथुन : हरे रंग के धागा की राखी।

कर्क : मोती की या सफेद रंग।

¨सह : गुलाबी रंग की राखी।

कन्या : हरे रंग का रेशमी धागा।

तुला : चांदी या सिल्वर की राखी।

वृश्चिक : लाल रंग की राखी।

धनु : पीले रंग की राखी पुण्यकारी।

मकर : गहरे भूरे रंग की राखी।

कुंभ : भूरा रंग लाएगा उमंग।

मीन : पीले रंग की राखी शुभकारी।

 

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