बलिया: ग्राम प्रहरी यूनियन का 8 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन

क्योंकि लोग इसे अपने जान माल की सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे है। गुजरे वक्त में जब पुलिस तंत्र उतनी विकसित नहीं थी। उस वक्त खाकी वर्दी से लोग भय खाते थे।

बदलते दौर के साथ दशकों पुरानी पहरेदारी प्रथा अब प्रायः समाप्त हो गई। लेकिन अपराध में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि से पहरेदारी की प्रथा का चलन पुनः अपनाने को लेकर लोग विवश हो गए हैं।

क्योंकि लोग इसे अपने जान माल की सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे है। गुजरे वक्त में जब पुलिस तंत्र उतनी विकसित नहीं थी। उस वक्त खाकी वर्दी से लोग भय खाते थे।

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उस वक्त भी गांवो टोले, मुहल्ले में चौकीदार रातभर जागते रहो की आवाज लगाते थे। जिस कारण लोग इत्मिनान से आराम की नींद सोते थे। वहीं लाल पगडी वाले इन चौकीदारो को पहरा ,और जिन्हें ग्राम प्रहरी भी कहते हैं । इंडी चौकीदारों ने उत्तर प्रदेश ग्राम प्रहरी यूनियन के जिला इकाई ने कलेक्ट्र परिसर में वरिष्ठ चौकीदार माया शंकर पासवान की अध्यक्षता में धरना और प्रदर्शन (Demonstration) किया।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने ग्राम चौकीदार को  राज्य कर्मचारी का दर्जा दिये जाने और मानदेय 25 सौ से बढ़ाकर 7000 किए जाने की  मांग की ।

अपने सबोधन मे वक्ताओं ने कहा कि- हरियाणा,बिहार,झारखण्ड,गुजरात आदि  प्रांतों में ग्राम प्रहरीयों को चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया गया है, परंतु दुर्भाग्य की बात हैकि हमारे प्रदेश में आजादी के बाद से अब तक मात्र 25 सौ रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है।

इतना ही नहीं शासन द्वारा निर्धारित उपकरण जैसे,लाठी ,साफा,टार्च और वर्दी भी विगत कई वर्षों से ग्राम प्रहरियों को नहीं दी गई है। और थानो मे जो हमसे बेगारी कराई जाती वो बंद होनी चाहिए।

Report- S.Asif Hussain

 

 

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