दिल्ली के ‘उसेन बोल्ट’ की असली उसेन बोल्ट से हुई मुलाकात, लगा लिया गले

नई दिल्ली। हाल ही में ‘खेलो इंडिया स्कूल गेम्स’ में फर्राटा किंग बने निसार अहमद जमैका से अपनी ट्रेनिंग लेकर भारत वापस लौट गए हैं. जमैका से स्वदेश लौटे निसार ने वहां के अपने अनुभव साझा किए हैं. दिल्ली की एक झुग्गी में रहने वाले निसार का कहना है कि उसेन बोल्ट से मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है. निसार का कहना है कि जिस महान एथलीट से मिलने का सपना वह सोते-जागते देखते थे, उनसे मिलकर वह बहुत खुश हैं.

निसार का कहना है कि बोल्ट से मिलना बिल्कुल वैसा ही है जैसे मैंने खुली आंखों से कोई सपना देखा हो. वह मेरे सामने साक्षात मौजूद थे. मैं उन्हें छू सकता था. उनसे बातें कर सकता था, उनके साथ सेल्फी खींच सकता था. मैंने उन्हें गले भी लगाया. निसार ने बताया कि बोल्ट ने उनकी तारीफ भी की.

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में निसार ने बताया कि बोल्ट ने मुझसे कहा कि, मैं अपनी उम्र की कैटेगिरी में काफी अच्छा हूं. मुझे अपनी टेक्नीक में और सुधार करना होगा क्योंकि मुझे एक सफल इंटरनेशनल स्प्रिंटर्स बनना है. वहीं, योहाना ब्लेक ने कहा कि, मेरी रनिंग अच्छी है. मेरे पास रफ्तार है. उन्होंने मुझे और मेहनत करने की सलाह दी.

बोल्ट-ब्लेक ने दिए जूते
उसेन बोल्ट और योहाना ब्लेक ने निसार को सिर्फ टिप्स ही नहीं दी, बल्कि जूते भी दिए. दोनों खिलाड़ियों ने ऑटोग्राफ के साथ निसार को स्पाइक्स दिए.

जहां बोल्ट ने ली ट्रेनिंग वहीं पहुंचे निसार अहमद
ओलिंपिक्स में मेडल जीतने का सपना लिए निसार भारत के उन 13 खिलाड़ियों में शामिल हुए थे, जिन्हें जमैका के किंगस्टन रेसर्स ट्रैक क्लब एक महीने की स्पेशल ट्रेनिंग के लिए ले जाया गया. देशभर से इन रेसर्स को ट्रेनिंग के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) जमैका ले थी.

बता दें कि निसार ने पिछले साल भोपाल में हुए स्कूल नेशनल्स में गोल्ड हासिल किया था, जहां 100 मीटर में उनकी टाइमिंग 10:76 सेकंड थी. इसके बाद विजयवाड़ा में हुए जूनियर नेशनल्स में उन्होंने नेशनल रिकॉर्ड बनाकर 100 मीटर में 10.85 सेकंड, 200 मीटर में 21:73 सेकंड की टाइमिंग के साथ गोल्ड जीते थे.

पिता चलाते हैं रिक्शा, मां मांजती हैं बर्तन
निसार अहमद 10X10 के कमरे में आजाद पुर रेलवे ट्रेक के पास बड़ा बाग स्लम में  रहता है. इसी छोटे से कमरे में एक स्लैब डालकर किचन बनाई गई है. एक छोटा सा कूलर रखा है. यहां हवा के आने-जाने का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता. इसी घर में निसार अपने पिता, मां और एक बड़ी बहन के साथ रहता है. निसार के पिता के दाएं पैर में एक घाव है. वह कहते हैं कि इसमें बहुत दर्द होता है लेकिन मेरे पास रिक्शा चलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. मैं 200 रुपए प्रतिदिन कमाता हूं. निसार की मां कुछ घरों में बर्तन साफ करती हैं ताकि कुछ आय बढ़ सके.

 

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