पेंशनर की मृत्यु के बाद परिजन ले रहे पेंशन!

pensionतहलका एक्सप्रेस ब्यूरो, लखनऊ। कोषागार निदेशालय ने पेंशनर की मौत के बाद परिजनों द्वारा उनके खाते से पेंशन लेते रहने का मामला पकड़ा है| बताया जा रहा है कि ये वे लोग हैं जो फैमिली पेंशन नहीं लेते। आकलन के मुताबिक दस सालों में पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम डूब चुकी है। अब ब्याज सहित वसूली के आदेश दिये गए और दो सौ करोड़ रुपये वसूले भी जा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में प्रदेश में करीब दस लाख पेंशनर हैं। इन सभी को पेंशन बैंक खातों के माध्यम से भेजी जाती है। जिन पेंशनरों की मृत्यु की सूचना मिलती है, उनकी पेंशन रोक दी जाती है। वर्ष में एक बार पेंशनर द्वारा अपना जीवित प्रमाण पत्र खुद कोषागार जाकर देने का नियम है। एक बार जीवन प्रमाण पत्र मिलने के बाद अगले वर्ष तक पेंशन खाते में जाती रहती है। इस बीच यदि पेंशनर की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजनों की जिम्मेदारी है कि वे तत्काल इसकी सूचना बैंक व कोषागार को दें, ताकि उनकी पेंशन बंद की जा सके पर ऐसा नहीं हो रहा। बहुत से परिजनों ने पेंशनर की मृत्यु की जानकारी नहीं दी जबकि इसके विपरीत वे संयुक्त खाते, चेक या एटीएम आदि का लाभ उठाकर पेंशन निकालते रहे। कोषागार निदेशक के मुताबिक औसतन पचास हजार पेंशनरों की मृत्यु हर वर्ष होती है। इन्हें आठ हजार से अस्सी हजार रुपये तक पेंशन दी जाती है। 15 हजार रुपये औसत पेंशन मानकर बिना सूचना के छह माह पेंशन जारी करने को आधार बनाकर जोड़ा गया तो हर वर्ष औसतन 500 करोड़ रुपये कोषागार के खाते से मृत पेंशनरों के नाम जा रहे हैं। खातों में पेंशन जाने की योजना वर्ष 2005 में शुरू की गयी थी, इस तरह बीते दस वर्षो में कम से कम 5000 करोड़ रुपये के पेंशन घपले का आकलन किया गया है और यह राशि अधिक भी हो सकती है।

 

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