सिन्हा ने लगाये गंभीर आरोप- पनामा पेपर्स मामले में किसको बचाने की कोशिश कर रहे हैं जेटली

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के 80 साल में नौकरी मांगने के आरोप का करारा जवाब दिया है। सिन्हा ने कहा कि ”80 साल के बाद भी नौकरी ढूंढ रहा हूँ। अच्छा मजाक था”। उन्होंने कहा, जेटली मेरे इतिहास में जाने के बजाय, मैंने जो तथ्य रखे हैं उनका जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। सिन्हा ने सीधा सवाल किया कि देश में छह तिमाही से आर्थिक विकास दर क्यों गिर रही है, वह इसका जवाब दें।

जेटली दिल्ली में बैठने वाले हवाई नेता

सिन्हा ने पूछा देश में बेरोजगारी है या नहीं है। देश में किसान बदहाल है या नहीं है। आज ट्रेडर बदहाल है या नहीं है। वो इस बात का जवाब दे दें। सिन्हा ने जेटली पर हमला करते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे जो हवाई नेता हैं, जो दिल्ली में ही बैठते हैं। उनका जमीनी स्तर से कहीं कोई लगाव नहीं है।

पनामा पेपर्स पर क्या कार्रवाई हुई ? 

सिन्हा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ”आज देश में सब खुशहाल हैं। भ्रष्टाचार ख़त्म हो गया है, कालाधन ख़त्म हो गया है”। उन्होंने कहा कि सरकार की ये सारी बातें जुमला हैं। सिन्हा ने सवाल किया ”अभी तक पनामा पेपर्स के ऊपर क्या कार्रवाई हुई। HSBC लिस्ट में जिन 750 लोगों का नाम आया था उनका क्या हुआ”।

जेटली पर आरोप लगाते हुए सिन्हा ने कहा ‘साढ़े तीन साल में इस वित्त मंत्री ने कालेधन पर क्या कार्रवाई की। विदेशों से कालाधन लौटकर आया क्या। जबकि पाकिस्तान जैसे देश में एक प्रधानमंत्री को वहां की सुप्रीम कोर्ट ने अपदस्त कर दिया, क्योंकि उनका नाम पनामा पेपर्स में आया था”।

सिन्हा ने कहा  ”यहाँ पर पनामा पेपर्स के नाम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसको बचाने की कोशिश कर रहे हैं अरुण जेटली, स्पष्ट करें”। सिन्हा ने कहा कि इसके बारे में ज्यादा जानना है तो रामजेठमलानी से मिलिए जिन्होंने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को 9 पेज का एक पत्र भेजा। जिसमे कहा कहा गया कि कैसे उनके वित्त मंत्री सदन और सदन के बाहर देश को गुमराह कर रहे हैं ।

जब परमाणु परिक्षण किया था तब आर्थिक प्रतिबंधों का जेटली ने किया क्या सामना ? 

यशवंत सिन्हा ने कहा कि ”1998 में जब अटल बिहारी सरकार ने तय किया कि हमको परमाणु परीक्षण करेंगे। तब दुनिया के देशों ने हम पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए थे, तो क्या उस वक़्त अरुण जेटली उसका मुकाबला कर रहे थे। आज कुछ संकट नहीं हैं।  क्रूड आयल के दाम मामूली स्तर पर हैं। लाखों- करोड़ों रूपये उन्हें इससे मिल जाता है जो कि हमें खर्च करने पड़ते थे।

नौकरी छोड़ने वाला नौकरी नहीं मांगता 

सिन्हा ने कहा, कि जेटली साहब शायद मेरी पृस्ठभूमि को भूल गए। क्योंकि 1984 में मेरी आईएएस की मौकरी 13 बाकी थी। और मैंने उस वक़्त नौकरी को छोड़ा था। उन्होंने कहा ”मैं रिटायर होकर राजनीति में नहीं आया। मैं नौकरी छोड़कर राजनीति में आया था। लेकिन वो (जेटली) भूल गए कि नौकरी मांगने वाला आदमी कभी नौकरी छोड़ता नहीं है। जेटली के नौकरी मांगने वाले आरोप से हास्यास्पद कोई आरोप नहीं हो सकता।

 

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